मैं आगे क्यों नहीं बढ़ पा रहा हूं. जीवन में आगे बढ़ने के लिए क्या जरूरी है?

मैं आगे क्यों नहीं बढ़ पा रहा हूं?
जीवन में कुछ बड़ा कैसे करूँ?
जीवन में आगे बढ़ने के लिए क्या चीज आपके अंदर होनी चाहिए
जीवन (लाइफ life)  में आगे बढ़ने के लिए क्या करे
जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमें क्या करना होगा?
जीवन में आगे बढ़ने के लिए क्या जरूरी है? 

जिंदगी में कुछ करना है तो क्या करना चाहिए? जीवन में हर कोई सफलता पाना चाहता है  लेकिन जीवन में सफल होने के लिए जो सबसे जरुरी गुण है क्या वो आपके पास है ,आखिर कौन सा वो गुण (quality  क्वालिटी)  है आइये जाने इस कहानी में :-

मैं आगे क्यों नहीं बढ़ पा रहा हूं? जीवन में कुछ बड़ा कैसे करूँ? जीवन में आगे बढ़ने के लिए क्या चीज आपके अंदर होनी चाहिए जीवन (लाइफ life)  में आगे बढ़ने के लिए क्या करे जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमें क्या करना होगा? जीवन में आगे बढ़ने के लिए क्या जरूरी है?

हर समय खुश कैसे महसूस करें जीवन में खुश रहने के लिए सबसे जरूरी क्या है, खुश रहने का मूल मंत्र क्या है

हमेशा खुश रहने के लिए क्या करना चाहिए?
हर समय खुश कैसे महसूस करें?
जीवन में खुश रहने के लिए सबसे जरूरी क्या है?
खुश रहने का मूल मंत्र क्या है?
हर रोज खुश और प्रेरित कैसे रहें?
सच्ची खुशी क्या है?

ढेर सारे ऐसे प्रश्न अक्सर हमारे दिमाग में आते हैं, समझ में नहीं आता कि आखिर सच्ची खुशी है क्या और कैसे मिलगी ये ख़ुशी तो आईये आज एक कहानी आपके साथ साझा करता हूँ जिसे पढ़ के सिर्फ आप ये नहीं जानेगे कि ख़ुशी क्या है बल्कि खुश कैसे रहा जा सकता है इसे भी सीख जायेंगे 
हमेशा खुश रहने के लिए क्या करना चाहिए? हर समय खुश कैसे महसूस करें? जीवन में खुश रहने के लिए सबसे जरूरी क्या है? खुश रहने का मूल मंत्र क्या है? हर रोज खुश और प्रेरित कैसे रहें? सच्ची खुशी क्या है?


हिन्दू रीति-रिवाज विज्ञान की कसौटी पर

डिस्कवरी (discovery)पर जेनेटिक बीमारियों से सम्बन्धित एक ज्ञानवर्धक कार्यक्रम था, उसमें एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने कहा कि जेनेटिक बीमारी (genetics disease) न हो, इसका एक ही इलाज है और वो है "सेपरेशन ऑफ़ जींस" (separation of genes) जिसका मतलब अपने नजदीकी रिश्तेदारों में विवाह नहीं करना चाहिए, क्योंकि नजदीकी रिश्तेदारों में जींस विभाजन (separate) नहीं हो पाता और जींस से जुड़ी (linked) बीमारियाँ जैसे हिमोफिलिया, कलर ब्लाईंडनेस और एल्बोनिज्म होने की १००% संभावना होती है। बहुत ख़ुशी हुई जब उसी कार्यक्रम में यह दिखाया गया कि आखिर "हिन्दूधर्म" में हजारों-हजारों साल पहले जींस और डीएनए के बारे में कैसे लिखा गया है ? हिंदुओं में गोत्र होते हैं और एक गोत्र के लोग आपस में शादी नहीं कर सकते ताकि जींस सेपरेट (विभाजित) रहे। उस वैज्ञानिक ने कहा कि आज पूरे विश्व को मानना पड़ेगा कि "हिन्दूधर्म ही" विश्व का एकमात्र ऐसा धर्म है जो "विज्ञान पर आधारित" है। हिंदू परम्पराओं से जुड़े अन्य वैज्ञानिक तर्क :- 

क्या वास्तव में सनातन धर्म में स्त्री के साथ भेदभाव किया गया है

 

पंडित जी की पोथी या हमारे हिंदू धर्म में बेटा और बेटी से भेदभाव क्यों किया जाता है ऐसे तो इन्सान का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा तो धर्म भी अपने आप समाप्त हो जायेगा?

ये एक बहु आयामी प्रश्न है इसलिए केवल ये सुन कर की बेटियों को दबा कर रखा जाता है इसका जवाब देना असंभव है। बेहतर होता की आप ये बताते की किस जगह पर बेटियों को दबाया गया है तो मैं ज्यादा अच्छे से आपको जवाब दे पाता।

लेकिन फिर भी आपकी बात को मान कर मै ये बता सकता हूँ की पधर्म के नाम पर जितना अधर्म फैला है उसका सबसे बड़ा कारन है की पुराणों में मिलावट की गयी है और आज का हिन्दू धर्म वैदिक मान्यताओं को भूल कर इस प्राणों की मिलावट को मान रहा है और इसी पर चल रहा है।

वेदों में महिलाओं के बारे में क्या कहा गया है आइये जानते हैं :

हनुमान जी के शादीशुदा होने के बाद भी उन्हें बालब्रह्मचारी क्यों कहा जाता है ?

सर्व प्रथम ब्रह्मचारी है कौन इस पर विचार करते हैं। ब्रह्म +आचारी अर्थात ब्रह्म की भाँति जो आचरण करे या ब्रह्म द्वारा दिखाये गए पथ 👣 पर जो चले उसे ही ब्रह्मचारी कहा जाता है।

ब्रह्मचारी का अर्थ है इंद्रियों और विचारों पर पूर्ण सँयम (नियंत्रण नहीं), विकारों पर संपूर्ण अधिकार।

सनातन धर्म में परिक्रमा क्या है और इसे क्यों कराते हैं

 हिन्दू धर्म में परिक्रमा का बड़ा महत्त्व है। परिक्रमा से अभिप्राय है कि सामान्य स्थान या किसी व्यक्ति के चारों ओर उसकी बाहिनी तरफ से घूमना। इसको 'प्रदक्षिणा करना' भी कहते हैं, जो षोडशोपचार पूजा का एक अंग है। प्रदक्षिणा की प्रथा अतिप्राचीन है। वैदिक काल से ही इससे व्यक्ति, देवमूर्ति, पवित्र स्थानों को प्रभावित करने या सम्मान प्रदर्शन का कार्य समझा जाता रहा है। दुनिया के सभी धर्मों में परिक्रमा का प्रचलन हिन्दू धर्म की देन है। 

परिक्रमा मार्ग और दिशा : 'प्रगतं दक्षिणमिति प्रदक्षिणं’ के अनुसार अपने दक्षिण भाग की ओर गति करना प्रदक्षिणा कहलाता है। प्रदक्षिणा में व्यक्ति का दाहिना अंग देवता की ओर होता है। 

 ‘शब्दकल्पद्रुम’ में कहा गया है कि देवता को उद्देश्य करके दक्षिणावर्त भ्रमण करना ही प्रदक्षिणा है।

प्रदक्षिणा का प्राथमिक कारण सूर्यदेव की दैनिक चाल से संबंधित है। जिस तरह से सूर्य प्रात: पूर्व में निकलता है, दक्षिण के मार्ग से चलकर पश्चिम में अस्त हो जाता है, उसी प्रकार वैदिक विचारकों के अनुसार अपने धार्मिक कृत्यों को बाधा विध्नविहीन भाव से सम्पादनार्थ प्रदक्षिणा करने का विधान किया गया। शतपथ ब्राह्मण में प्रदक्षिणा मंत्र स्वरूप कहा भी गया है, सूर्य के समान यह हमारा पवित्र कार्य पूर्ण हो।

 दार्शनिक दृष्टि से भी देखें तो संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रत्येक ग्रह-नक्ष‍त्र किसी न किसी तारे की परिक्रमा कर रहा है। यह परिक्रमा ही जीवन का सत्य है। व्यक्ति का संपूर्ण जीवन ही एक चक्र है। इस चक्र को समझने के लिए ही परिक्रमा जैसे प्रतीक को निर्मित किया गया। भगवान में ही सारी सृष्टि समाई है, उनसे ही सब उत्पन्न हुए हैं, हम उनकी परिक्रमा लगाकर यह मान सकते हैं कि हमने सारी सृष्टि की परिक्रमा कर ली है। परिक्रमा का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व भी है । किस देवी देवता की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए इस पर अगली पोस्ट पर चर्चा करेंगें।

आयुर्वेद का अमृत। जीवनदायी गिलोय

  गिलोय को अमृता भी कहा जाता है। यह स्वयं भी नहीं मरती है और उसे भी मरने से बचाती है, जो इसका प्रयोग करे। कहा जाता है की देव दानवों के युद्ध में अमृत कलश की बूँदें जहाँ जहाँ पड़ीं, वहां वहां गिलोय उग गई। गिलोय हर तरह के दोष का नाश करती है। 
            कैंसर की बीमारी में ६ से ८ इंच की इसकी डंडी लें इसमेंं ह्वीटग्रास का जूस और ५-७ पत्ते तुलसी के और ४-५ पत्ते नीम के डालकर सबको कूटकर काढ़ा बना लें। इसका सेवन खाली पेट करने से खून की कमी भी नहीं होती है। इसकी डंडी का ही प्रयोग करते हैं, पत्तों का नहीं, उसका लिसलिसा पदार्थ ही औषधि है।
             गिलोय की डंडी को चूस भी सकते हैैं, चाहे तो डंडी कूटकर, उसमें पानी मिलाकर छान लें, हर प्रकार से गिलोय लाभ पहुंचाएगी। इसके सेवन से रक्त संबंधी विकार नहीं होते हैं, टाक्सिन खत्म हो जाते हैं और बुखार तो बिलकुल नहीं आता। पुराने से पुराना बुखार खत्म हो जाता है।
           इससे पेट की बीमारी, दस्त, पेचिश, आंव, त्वचा की बीमारी, लीवर की बीमारी, गांठें, मधुमेह, बढ़ा हुआ ईएसआर, टीबी, लिकोरिया, हिचकी आदि ढेरों बीमारियाँ ठीक होती हैं । 

शिवलिंग पर रोज़ाना हज़ारों लीटर दूध की बर्बादी को आप कैसे उचित ठहरा सकते हैं?

 क्या ऐसा करना उचित नही होगा कि आप अपने बड़े घर को बेच कर एक झोपड़ी में चले जाएं और बाकी बचे पैसे गरीबों में दान कर दें?

  • या ये कि आप अपने बच्चे को सरकारी विद्यालय भेजें और बचे हुए पैसे से गरीब बच्चों को पढ़ा दें?
  • या ये कैसा रहेगा कि आप अपना और अपने परिवार का इलाज सरकारी अस्पताल में कराएं और बाकी पैसो से गरीबों का इलाज बढ़िया अस्पताल में करवा दें?

अलंकारकि भाषा का चमत्कार -ऐसा चमत्कार हिंदी में ही हो सकता है

हमारी कहावतों में कितना सार छुपा है। एक-एक शब्द चासनी में डूबा हुआ रहता है  , हृदय को जो भावविभोर कर दे और काम शब्दों में असीमित अर्थ समझा दे ऐसी ताकत ऐसा हुनर हमारी कहावतों और दोहों संस्कृत में लिखे श्लोकों में हमेशा देखने को मिल जाता है, 
भावार्थ समझ गए तो ज्ञान का भंडार मिल जाता है मात्र शब्दों का अर्थ समझे तो अर्थ का अनर्थ हो जाता है
इन्हीं कहावतों के जरिए हमारे बुजुर्ग, जिनको हम कम पढ़ा-लिखा समझते थे, हमारे अंदर गाहे-बगाहे संस्कार का बीज बोते रहते थे। आईये आज एक उदहारण देखते हैं 

चार मिले चौंसठ खिले, बीस रहे कर जोड़!
प्रेमी सज्जन दो मिले, खिल गए सात करोड़!!

मुझसे एक बुजुर्गवार ने इस कहावत का अर्थ पूछा.... काफी सोच-विचार के बाद भी जब मैं बता नहीं पाया, तो मैंने कहा – "बाबा आप ही बताइए, मेरी समझ में तो कुछ नहीं आ रहा !"

तब एक रहस्यमयी मुस्कान के साथ बाबा समझाने लगे – "देखो बेटे, यह बड़े रहस्य की बात है... चार मिले – मतलब जब भी कोई मिलता है, तो सबसे पहले आपस में दोनों की आंखें मिलती हैं, इसलिए कहा, चार मिले..

The 5 Keys to Finding Your Divine Purpose - by Dante Petrilla

Finding your divine purpose is not as difficult as you might imagine. If this is actually true, then why do so few people actually achieve this, and go through the motions of life without purpose or reason, feeling lost, unfulfilled and disconnected? The answer is simple. Most people do not like to think. It’s too much like hard work, and most people will run a mile to avoid some serious thought.


I hate to break it to you, but if you want to discover your divine purpose, you will have to engage in some thought! If you’re serious about this, you will need to accept the fact that your mind has the capacity to give you all the answers you’re seeking.


Here are the keys to discovering your divine purpose:

कोरोना वायरस से ऐसे करें बचाव



राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज हंडिया, प्रयागराज के प्राचार्य प्रो. अवधेश कुमार सिंह ने कोरोना वायरस से बचने के लिए निम्न सुझाव भी दिए हैं।

आप क्या हो आप पर निर्भर है

एक था भिखारी ! रेल सफ़र में भीख़ माँगने के दौरान एक सूट बूट पहने सेठ जी उसे दिखे। उसने सोचा कि यह व्यक्ति बहुत अमीर लगता है, इससे भीख़ माँगने पर यह मुझे जरूर अच्छे पैसे देगा और वह उस सेठ से भीख़ माँगने लगा।

अष्ट लक्ष्मी

माता लक्ष्मी की पूजा (जिनको धन की देवी के नाम से जाना जाता है) को बहुत आदर-सम्मान से दिवाली के पर्व पर पूरे भारत-वर्ष में पूजा जाता है। नारायण लक्ष्य है और लक्ष्मी जी उन तक पहुँचने का एक साधन। गुरुदेव श्री श्री रवि शंकरजी ने इन आठ प्रकार के धन या अष्ट लक्ष्मी के बारे में विस्तार से वर्णन किया है। यहां अष्ट लक्ष्मी पर मूल हिंदी वार्तालाप के अंश हैं:

Don't analyse the problems only from an expert point of view alone..Think Simple... Do Simple and Live Simple

An engineer in a car manufacturing company designs a world class car. The CEO is impressed with the outcome and praised him a lot.
While trying to bring out the car from the manufacturing area to the showroom, they realised that the car is 2 inches taller than the entrance.

The engineer felt bad that he didn't notice this one before creating the car.

Learning From Your Mistakes - by John C. Maxwell

I used to think that as I gained maturity and experience I would make fewer mistakes. I thought, "I'm going to get better at this, because I made a lot of mistakes in the beginning." 
 
I believed that there would come a day when I wouldn't make very many mistakes, because I'd get better. What I learned was that as I gained maturity and experience, I would continue to make mistakes, but I would learn more quickly from them. 
 

7 Secrets to Managing Distraction Forever" - by Niti Sharma

In a world which is saturated with social media and lots of interruptions, we struggle to focus on what’s in front of us. With so many voices vying for attention, it’s difficult to know what is worthy of our time and we end up tuning it all out. In a study, it is found out that, office distractions consume over two hours on average every day

The Solutions to Life's 10 Biggest Problems - By Philip Humbert

Every day clients tell me about their problems, often in great detail, and I've noticed patterns that show up over and over. For many people, life's problems are viewed as "not enough money" or "not enough time". For couples, the problems are often around communication" or "parenting" or sex. They think if they only had more money or more time or better sex or a better job, things would be wonderful.

But it doesn't work that way, because these things are not the BIG PROBLEM. From my experience, I suggest life's really big problems are: 

1. Tunnel Vision. 
The tendency to focus only on the immediate crisis or sore spot. Under stress, things look worse or more complex than they really are. The solution: Perspective. Ask if it will matter in 6 months. Ask what else is going on? How did I create this situation and, in an ideal world, what would I like to do about it?

विज्ञान में विफलता नहीं होती, केवल प्रयोग और प्रयास होते हैं.

प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों से कहा कि वे मिशन में आई रुकावटों के कारण अपना दिल छोटा नहीं करें, क्योंकि नई सुबह जरूर होगी. उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा, हर मुश्किल, हर संघर्ष, हर कठिनाई, हमें कुछ नया सिखाकर जाती है, कुछ नए आविष्कार, नई टेक्नोलॉजी के लिए प्रेरित करती है और इसी से हमारी आगे की सफलता तय होती हैं. ज्ञान का अगर सबसे बड़ा शिक्षक कोई है तो वो विज्ञान है.